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|| Bhagavad Gita ||

ज्ञानकर्मसंन्यासयोग

Gyaan Karm Sanyas Yog
The Yoga of Knowledge & Action
📜 42 Verses 📖 Chapter 4
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 Chapter Summary

The fourth chapter of the Gita, 'Jnana Karma Sanyasa Yoga', weaves together action and knowledge. Krishna opens by tracing the ancient lineage of this yoga (Sun → Manu → Ikshvaku) and reveals the secret of His many births. Here comes the Gita's famous declaration — 'Whenever dharma declines and adharma rises, I manifest Myself' — the promise of divine descent (avatara) age after age. He then explains the subtle distinction between action, inaction and forbidden action, describes many forms of yajna (sacrifice), and shows that all action culminates in knowledge. The chapter closes by glorifying knowledge — which burns away all sins like fire — and, stressing faith and the cutting of doubt, urges Arjuna to take his stand in yoga and rise to fight.

 अध्याय सारांश (हिंदी)

गीता का चौथा अध्याय 'ज्ञानकर्मसंन्यासयोग' कर्म और ज्ञान को जोड़ता है। आरम्भ में श्रीकृष्ण इस योग की प्राचीन परम्परा (सूर्य → मनु → इक्ष्वाकु) बताते हैं और अपने अनेक जन्मों का रहस्य खोलते हैं। यहीं गीता का प्रसिद्ध वचन आता है — 'यदा यदा हि धर्मस्य...' अर्थात् जब-जब धर्म घटता और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान अवतार लेते हैं। फिर वे कर्म, अकर्म और विकर्म का गूढ़ भेद समझाते हैं, अनेक प्रकार के यज्ञों का वर्णन करते हैं, और बताते हैं कि सब कर्म अन्ततः ज्ञान में समाप्त होते हैं। अध्याय के अंत में ज्ञान की महिमा — जो सब पापों को अग्नि की तरह भस्म कर देता है — और श्रद्धा व संशय-नाश पर ज़ोर देकर अर्जुन को कर्मयोग में स्थित होकर युद्ध के लिए तैयार होने को कहा गया है।

Verses

42 verses in total

1 Verse 4.1
श्रीभगवानुवाच
इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्।
विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत्।।1।।
English Meaning

The Blessed Lord said: I taught this imperishable yoga to the Sun (Vivasvan); the Sun told it to Manu, and Manu told it to King Ikshvaku.

हिंदी अर्थ

श्री भगवान बोले: इस अविनाशी योग को मैंने सबसे पहले सूर्य से कहा था; सूर्य ने अपने पुत्र वैवस्वत मनु को, और मनु ने अपने पुत्र राजा इक्ष्वाकु को यह ज्ञान दिया।

2 Verse 4.2
एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदुः।
स कालेनेह महता योगो नष्टः परन्तप।।2।।
English Meaning

Thus received through succession, the royal sages knew this yoga, O scorcher of foes; but with the long passage of time it was nearly lost in this world.

हिंदी अर्थ

हे परंतप! इस तरह परम्परा से प्राप्त इस योग को राजर्षियों ने जाना; किन्तु बहुत समय बीतने पर यह योग इस पृथ्वी पर लगभग लुप्त हो गया।

3 Verse 4.3
स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः।
भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम्।।3।।
English Meaning

That same ancient yoga I have told you today, because you are My devotee and dear friend; for this is the highest secret.

हिंदी अर्थ

तू मेरा भक्त और प्रिय सखा है, इसीलिए वही पुरातन योग आज मैंने तुझे बताया है — क्योंकि यह अत्यन्त उत्तम और गुप्त रखने योग्य रहस्य है।

4 Verse 4.4
अर्जुन उवाच
अपरं भवतो जन्म परं जन्म विवस्वतः।
कथमेतद्विजानीयां त्वमादौ प्रोक्तवानिति।।4।।
English Meaning

Arjuna said: Your birth was recent, while the Sun's was long ago; how am I to understand that You taught this yoga at the beginning?

हिंदी अर्थ

अर्जुन बोले: आपका जन्म तो हाल ही का है और सूर्य का जन्म बहुत पुराना (कल्प के आरम्भ का) है; फिर मैं कैसे मानूँ कि आपने ही आरम्भ में यह योग कहा था?

5 Verse 4.5
श्रीभगवानुवाच
बहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन।
तान्यहं वेद सर्वाणि न त्वं वेत्थ परन्तप।।5।।
English Meaning

The Blessed Lord said: Many births of Mine and yours have passed, O Arjuna; I know them all, but you do not.

हिंदी अर्थ

श्री भगवान बोले: हे परंतप! मेरे और तेरे अनेक जन्म बीत चुके हैं; उन सबको मैं जानता हूँ, पर तू नहीं जानता।

6 Verse 4.6
अजोऽपि सन्नव्ययात्मा भूतानामीश्वरोऽपि सन्।
प्रकृतिं स्वामधिष्ठाय सम्भवाम्यात्ममायया।।6।।
English Meaning

Though unborn and imperishable, and the Lord of all beings, yet ruling over My own nature, I manifest Myself through My divine power (yoga-maya).

हिंदी अर्थ

यद्यपि मैं अजन्मा और अविनाशी हूँ, तथा समस्त प्राणियों का ईश्वर हूँ, फिर भी अपनी प्रकृति को अधीन करके अपनी योगमाया से प्रकट होता हूँ।

7 Verse 4.7
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।7।।
English Meaning

Whenever there is a decline of dharma and a rise of adharma, O Bharata, then I manifest Myself.

हिंदी अर्थ

हे भारत! जब-जब धर्म का ह्रास और अधर्म का उभार होता है, तब-तब मैं अपने रूप को रचकर (साकार होकर) प्रकट होता हूँ।

8 Verse 4.8
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।।8।।
English Meaning

For the protection of the good, the destruction of the wicked, and the re-establishment of dharma, I appear age after age.

हिंदी अर्थ

सज्जनों की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए मैं युग-युग में प्रकट होता हूँ।

9 Verse 4.9
जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः।
त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन।।9।।
English Meaning

One who truly knows My divine birth and actions, O Arjuna, is not reborn on leaving the body, but comes to Me.

हिंदी अर्थ

हे अर्जुन! मेरे जन्म और कर्म दिव्य (अलौकिक) हैं — जो इसे तत्त्व से जान लेता है, वह शरीर छोड़कर फिर जन्म नहीं लेता, बल्कि मुझे ही प्राप्त होता है।

10 Verse 4.10
वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिताः।
बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्भावमागताः।।10।।
English Meaning

Freed from attachment, fear and anger, absorbed in Me and taking refuge in Me, many have been purified by the fire of knowledge and have attained My being.

हिंदी अर्थ

राग, भय और क्रोध से मुक्त, मुझमें ही तल्लीन और मेरी शरण में रहने वाले बहुत-से भक्त ज्ञानरूपी तप से पवित्र होकर मेरे स्वरूप को प्राप्त कर चुके हैं।

11 Verse 4.11
ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्।
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः।।11।।
English Meaning

As people approach Me, so do I reward them, O Partha; all of them follow My path in every way.

हिंदी अर्थ

हे अर्जुन! जो भक्त मुझे जिस भाव से भजते हैं, मैं भी उन्हें उसी भाव से फल देता हूँ; सब मनुष्य हर प्रकार से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करते हैं।

12 Verse 4.12
काङ्क्षन्तः कर्मणां सिद्धिं यजन्त इह देवताः।
क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा।।12।।
English Meaning

Those desiring success in action worship the gods here, for in the human world success born of action comes quickly.

हिंदी अर्थ

इस मनुष्य-लोक में कर्मफल चाहने वाले लोग देवताओं की पूजा करते हैं, क्योंकि कर्म से उत्पन्न सिद्धि उन्हें शीघ्र मिल जाती है।

13 Verse 4.13
चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः।
तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम्।।13।।
English Meaning

The four orders (varnas) were created by Me according to the distribution of qualities and actions; though I am their author, know Me, the changeless, to be the non-doer.

हिंदी अर्थ

गुण और कर्म के विभाग के अनुसार चारों वर्णों की रचना मैंने की है; इसका कर्ता होते हुए भी मुझ अविनाशी को तू वास्तव में अकर्ता ही जान।

14 Verse 4.14
न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कर्मफले स्पृहा।
इति मां योऽभिजानाति कर्मभिर्न स बध्यते।।14।।
English Meaning

Actions do not taint Me, nor have I any longing for their fruits; one who knows Me thus is not bound by actions.

हिंदी अर्थ

न कर्म मुझे लिप्त करते हैं, न कर्मफल में मेरी कोई चाह है — जो मुझे इस रूप में तत्त्व से जान लेता है, वह भी कर्मों से नहीं बँधता।

15 Verse 4.15
एवं ज्ञात्वा कृतं कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभिः।
कुरु कर्मैव तस्मात्त्वं पूर्वैः पूर्वतरं कृतम्।।15।।
English Meaning

Knowing this, the ancient seekers of liberation also performed action; therefore you too should act, as they did in days of old.

हिंदी अर्थ

पूर्वकाल के मुमुक्षुओं ने भी यही जानकर कर्म किये थे; इसलिए तू भी पूर्वजों द्वारा सदा से किये जाने वाले कर्मों को ही कर।

16 Verse 4.16
किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः।
तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्।।16।।
English Meaning

What is action and what is inaction? — even the wise are confused here. So I shall explain to you that knowledge of action, knowing which you will be freed from evil.

हिंदी अर्थ

कर्म क्या है और अकर्म क्या — इसका निर्णय करने में बुद्धिमान भी मोहित हो जाते हैं। इसलिए वह कर्म-तत्त्व मैं तुझे बताऊँगा, जिसे जानकर तू अशुभ (कर्मबन्धन) से मुक्त हो जाएगा।

17 Verse 4.17
कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं बोद्धव्यं च विकर्मणः।
अकर्मणश्च बोद्धव्यं गहना कर्मणो गतिः।।17।।
English Meaning

One must understand the nature of action, of forbidden action, and of inaction; for the way of action is profound.

हिंदी अर्थ

कर्म का स्वरूप जानना चाहिए, विकर्म (निषिद्ध कर्म) का भी, और अकर्म का भी — क्योंकि कर्म की गति बहुत गूढ़ है।

18 Verse 4.18
कर्मण्यकर्म यः पश्येदकर्मणि च कर्म यः।
स बुद्धिमान्मनुष्येषु स युक्तः कृत्स्नकर्मकृत्।।18।।
English Meaning

One who sees inaction in action, and action in inaction — he is wise among men; he is a yogi who has accomplished all action.

हिंदी अर्थ

जो कर्म में अकर्म और अकर्म में कर्म देखता है, वही मनुष्यों में बुद्धिमान है; वह योगी समस्त कर्म करते हुए भी (बँधता नहीं)।

19 Verse 4.19
यस्य सर्वे समारम्भाः कामसङ्कल्पवर्जिताः।
ज्ञानाग्निदग्धकर्माणं तमाहुः पण्डितं बुधाः।।19।।
English Meaning

One whose every undertaking is free from desire and selfish intent, whose actions are burnt by the fire of knowledge — him the wise call a sage.

हिंदी अर्थ

जिसके सब कर्म कामना और संकल्प से रहित हैं और जिसके कर्म ज्ञानरूपी अग्नि से भस्म हो चुके हैं, उस महापुरुष को ज्ञानीजन भी पण्डित कहते हैं।

20 Verse 4.20
त्यक्त्वा कर्मफलासङ्गं नित्यतृप्तो निराश्रयः।
कर्मण्यभिप्रवृत्तोऽपि नैव किञ्चित्करोति सः।।20।।
English Meaning

Having abandoned attachment to the fruits of action, ever content and dependent on nothing, such a one does nothing at all, even while fully engaged in action.

हिंदी अर्थ

जो कर्मफल की आसक्ति त्यागकर, संसार के आश्रय से रहित और परमात्मा में सदा तृप्त है, वह कर्मों में लगा रहकर भी वास्तव में कुछ नहीं करता।

21 Verse 4.21
निराशीर्यतचित्तात्मा त्यक्तसर्वपरिग्रहः।
शारीरं केवलं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्।।21।।
English Meaning

With body and mind controlled and all possessions given up, performing only bodily action, such a desireless one incurs no sin.

हिंदी अर्थ

जिसका शरीर-मन-इन्द्रियाँ वश में हैं और जिसने सब भोग-सामग्री का त्याग कर दिया है, ऐसा आशारहित पुरुष केवल शरीर-निर्वाह के कर्म करते हुए भी पाप को नहीं प्राप्त होता।

22 Verse 4.22
यदृच्छालाभसन्तुष्टो द्वन्द्वातीतो विमत्सरः।
समः सिद्धावसिद्धौ च कृत्वापि न निबध्यते।।22।।
English Meaning

Content with what comes unsought, beyond the pairs of opposites, free from envy, even in success and failure — such a one, though acting, is not bound.

हिंदी अर्थ

जो बिना माँगे स्वतः प्राप्त वस्तु में संतुष्ट रहता है, ईर्ष्या से रहित है, सुख-दुःख आदि द्वन्द्वों से परे है, और सिद्धि-असिद्धि में सम रहता है — वह कर्म करते हुए भी नहीं बँधता।

23 Verse 4.23
गतसङ्गस्य मुक्तस्य ज्ञानावस्थितचेतसः।
यज्ञायाचरतः कर्म समग्रं प्रविलीयते।।23।।
English Meaning

For one free from attachment, liberated, with the mind established in knowledge, acting only as yajna — all his actions dissolve completely.

हिंदी अर्थ

जिसकी आसक्ति मिट चुकी है, जो देह-अभिमान और ममता से मुक्त है, और जिसका चित्त परमात्मा के ज्ञान में स्थिर है — केवल यज्ञ-भाव से कर्म करने वाले ऐसे पुरुष के सब कर्म पूरी तरह विलीन हो जाते हैं।

24 Verse 4.24
ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्।
ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना।।24।।
English Meaning

The offering is Brahman, the oblation is Brahman, offered by Brahman into the fire of Brahman; one absorbed in this vision of Brahman in action attains Brahman alone.

हिंदी अर्थ

जिसमें अर्पण ब्रह्म है, हवि (आहुति) ब्रह्म है, ब्रह्मरूप अग्नि में ब्रह्मरूप कर्ता द्वारा दी गयी आहुति भी ब्रह्म है — ऐसे ब्रह्मकर्म में स्थित पुरुष को प्राप्य फल भी ब्रह्म ही है।

25 Verse 4.25
दैवमेवापरे यज्ञं योगिनः पर्युपासते।
ब्रह्माग्नावपरे यज्ञं यज्ञेनैवोपजुह्वति।।25।।
English Meaning

Some yogis offer sacrifice to the gods; others offer the self as sacrifice into the fire of Brahman, by the yajna of seeing oneness.

हिंदी अर्थ

कुछ योगी देव-पूजारूप यज्ञ करते हैं, तो दूसरे ब्रह्मरूपी अग्नि में अभेद-दर्शन के यज्ञ द्वारा आत्मा का ही हवन करते हैं।

26 Verse 4.26
श्रोत्रादीनीन्द्रियाण्यन्ये संयमाग्निषु जुह्वति।
शब्दादीन्विषयानन्य इन्द्रियाग्निषु जुह्वति।।26।।
English Meaning

Some offer the senses (hearing and the rest) into the fires of restraint; others offer the sense-objects (sound and the rest) into the fires of the senses.

हिंदी अर्थ

कुछ योगी श्रोत्र आदि इन्द्रियों को संयमरूपी अग्नियों में हवन करते हैं, तो दूसरे शब्द आदि विषयों को इन्द्रियरूपी अग्नियों में आहुत करते हैं।

27 Verse 4.27
सर्वाणीन्द्रियकर्माणि प्राणकर्माणि चापरे।
आत्मसंयमयोगाग्नौ जुह्वति ज्ञानदीपिते।।27।।
English Meaning

Yet others offer all the functions of the senses and the vital breath into the fire of self-control, kindled by knowledge.

हिंदी अर्थ

दूसरे योगी इन्द्रियों और प्राणों की सम्पूर्ण क्रियाओं को ज्ञान से प्रदीप्त आत्मसंयम-योगरूपी अग्नि में आहुत करते हैं।

28 Verse 4.28
द्रव्ययज्ञास्तपोयज्ञा योगयज्ञास्तथापरे।
स्वाध्यायज्ञानयज्ञाश्च यतयः संशितव्रताः।।28।।
English Meaning

Some perform sacrifice with material offerings, some with austerity, some with yoga; and others, of strict vows, perform the sacrifice of scriptural study and knowledge.

हिंदी अर्थ

कुछ द्रव्य-यज्ञ करते हैं, कुछ तप-यज्ञ, कुछ योग-यज्ञ; तथा कठोर व्रतधारी कुछ यत्नशील पुरुष स्वाध्याय और ज्ञान-यज्ञ करते हैं।

29-30 Verse 4.29 – 4.30
अपाने जुह्वति प्राणं प्राणेऽपानं तथापरे।
प्राणापानगती रुद्ध्वा प्राणायामपरायणाः।।29।।
अपरे नियताहाराः प्राणान्प्राणेषु जुह्वति।
सर्वेऽप्येते यज्ञविदो यज्ञक्षपितकल्मषाः।।30।।
English Meaning

Some offer the outgoing breath into the incoming, and the incoming into the outgoing; others, restraining the flow of both, are devoted to breath-control; and others, of regulated diet, offer the breaths into the breaths. All these know sacrifice, and by sacrifice their sins are destroyed.

हिंदी अर्थ

कुछ योगी प्राणवायु को अपान में और अपान को प्राण में हवन करते हैं; कुछ प्राण-अपान की गति रोककर प्राणायाम में लगे रहते हैं; और कुछ नियमित आहार करने वाले प्राणों को प्राणों में ही हवन करते हैं। ये सभी यज्ञ को जानने वाले और यज्ञ द्वारा पापों का नाश करने वाले हैं।

31 Verse 4.31
यज्ञशिष्टामृतभुजो यान्ति ब्रह्म सनातनम्।
नायं लोकोऽस्त्ययज्ञस्य कुतोऽन्यः कुरुसत्तम।।31।।
English Meaning

O best of the Kurus, those who eat the nectar-like remnants of sacrifice attain the eternal Brahman; this world is not for the one who performs no sacrifice — how then the next?

हिंदी अर्थ

हे कुरुश्रेष्ठ! यज्ञ से बचे अमृत-तुल्य अन्न को पाने वाले योगी सनातन ब्रह्म को प्राप्त होते हैं; जो यज्ञ ही नहीं करता उसके लिए यह लोक भी सुखद नहीं, फिर परलोक कैसे?

32 Verse 4.32
एवं बहुविधा यज्ञा वितता ब्रह्मणो मुखे।
कर्मजान्विद्धि तान्सर्वानेवं ज्ञात्वा विमोक्ष्यसे।।32।।
English Meaning

Thus many kinds of sacrifice are set forth in the Vedas; know them all to be born of action. Knowing this, you will be liberated.

हिंदी अर्थ

इसी प्रकार वेद-वाणी में अनेक प्रकार के यज्ञ विस्तार से कहे गये हैं; उन सबको मन, इन्द्रिय और शरीर की क्रिया से उत्पन्न जान — ऐसा जानकर तू कर्मबन्धन से मुक्त हो जाएगा।

33 Verse 4.33
श्रेयान्द्रव्यमयाद्यज्ञाज्ज्ञानयज्ञः परन्तप।
सर्वं कर्माखिलं पार्थ ज्ञाने परिसमाप्यते।।33।।
English Meaning

Knowledge-sacrifice is greater than any material sacrifice, O scorcher of foes; for all action, in its entirety, culminates in knowledge.

हिंदी अर्थ

हे परंतप! द्रव्यमय यज्ञ की तुलना में ज्ञान-यज्ञ कहीं श्रेष्ठ है; क्योंकि हे पार्थ! सम्पूर्ण कर्म अन्ततः ज्ञान में ही समाप्त हो जाते हैं।

34 Verse 4.34
तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया।
उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः।।34।।
English Meaning

Learn that knowledge by humble reverence, by inquiry and by service; the wise who have seen the truth will teach it to you.

हिंदी अर्थ

उस ज्ञान को तू तत्त्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ — विनम्रता से प्रणाम करके, सेवा करके और सरलता से प्रश्न करके; वे तुझे तत्त्वज्ञान का उपदेश देंगे।

35 Verse 4.35
यज्ज्ञात्वा न पुनर्मोहमेवं यास्यसि पाण्डव।
येन भूतान्यशेषेण द्रक्ष्यस्यात्मन्यथो मयि।।35।।
English Meaning

Knowing it, O Pandava, you will not fall into delusion again; by it you will see all beings in yourself, and then in Me.

हिंदी अर्थ

हे पाण्डव! जिसे जानकर तू फिर मोह में नहीं पड़ेगा, और जिस ज्ञान से तू समस्त प्राणियों को पहले अपने में और फिर मुझ परमात्मा में देखेगा।

36 Verse 4.36
अपि चेदसि पापेभ्यः सर्वेभ्यः पापकृत्तमः।
सर्वं ज्ञानप्लवेनैव वृजिनं सन्तरिष्यसि।।36।।
English Meaning

Even if you were the most sinful of all sinners, you would cross over all evil by the boat of knowledge.

हिंदी अर्थ

यदि तू सब पापियों से भी बड़ा पापी हो, तो भी ज्ञानरूपी नौका द्वारा सम्पूर्ण पाप-समुद्र को निश्चय ही पार कर जाएगा।

37 Verse 4.37
यथैधांसि समिद्धोऽग्निर्भस्मसात्कुरुतेऽर्जुन।
ज्ञानाग्निः सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते तथा।।37।।
English Meaning

As a blazing fire reduces fuel to ashes, O Arjuna, so the fire of knowledge reduces all actions to ashes.

हिंदी अर्थ

हे अर्जुन! जैसे प्रज्वलित अग्नि ईंधन को राख कर देती है, वैसे ही ज्ञानरूपी अग्नि सम्पूर्ण कर्मों को भस्म कर देती है।

38 Verse 4.38
न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।
तत्स्वयं योगसंसिद्धः कालेनात्मनि विन्दति।।38।।
English Meaning

There is nothing in this world as purifying as knowledge; one perfected in yoga finds it within the Self in due time.

हिंदी अर्थ

इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र करने वाला कुछ भी नहीं है; कर्मयोग से शुद्ध हुआ साधक समय आने पर इस ज्ञान को स्वयं अपने भीतर ही पा लेता है।

39 Verse 4.39
श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः।
ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति।।39।।
English Meaning

The one with faith, intent on it and with senses controlled, attains knowledge; and having attained it, soon reaches supreme peace.

हिंदी अर्थ

श्रद्धावान, साधन-परायण और जितेन्द्रिय मनुष्य ज्ञान को प्राप्त करता है; और ज्ञान पाकर वह शीघ्र ही परम शान्ति को प्राप्त हो जाता है।

40 Verse 4.40
अज्ञश्चाश्रद्दधानश्च संशयात्मा विनश्यति।
नायं लोकोऽस्ति न परो न सुखं संशयात्मनः।।40।।
English Meaning

But the ignorant, the faithless and the doubting one perishes; for the doubter there is neither this world, nor the next, nor happiness.

हिंदी अर्थ

किन्तु अज्ञानी, श्रद्धाहीन और संशयग्रस्त मनुष्य नष्ट हो जाता है; ऐसे संशयी के लिए न यह लोक है, न परलोक, न सुख।

41 Verse 4.41
योगसंन्यस्तकर्माणं ज्ञानसञ्छिन्नसंशयम्।
आत्मवन्तं न कर्माणि निबध्नन्ति धनञ्जय।।41।।
English Meaning

One who has renounced action through yoga, whose doubts are cut by knowledge, who is poised in the Self — actions do not bind him, O Dhananjaya.

हिंदी अर्थ

हे धनंजय! जिसने कर्मयोग से सब कर्म परमात्मा में अर्पित कर दिये और विवेक से सब संशय काट दिये, ऐसे आत्मवान पुरुष को कर्म नहीं बाँधते।

42 Verse 4.42
तस्मादज्ञानसम्भूतं हृत्स्थं ज्ञानासिनात्मनः।
छित्त्वैनं संशयं योगमातिष्ठोत्तिष्ठ भारत।।42।।
English Meaning

Therefore, O Bharata, cut this doubt born of ignorance, seated in your heart, with the sword of knowledge; take refuge in yoga and arise!

हिंदी अर्थ

इसलिए हे भरतवंशी! हृदय में बैठे इस अज्ञानजनित संशय को ज्ञानरूपी तलवार से काटकर, समत्वरूप कर्मयोग में स्थित हो जा और युद्ध के लिए खड़ा हो जा।

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