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|| Bhagavad Gita ||

विश्वरूपदर्शनयोग

Vishwaroop Darshan Yog
The Vision of the Cosmic Form
📜 55 Verses 📖 Chapter 11
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 Chapter Summary

The eleventh chapter, 'Vishvarupa Darshana Yoga', is the most awe-inspiring episode of the entire Gita. Arjuna asks to see the Lord's majestic cosmic form. Since it cannot be seen with ordinary eyes, Krishna grants him a 'divine eye', and Arjuna beholds the Universal Form — with countless mouths, eyes and arms, radiant as a thousand suns, holding the whole universe within. He is struck with terror as he sees the Kaurava warriors rushing into the Lord's fearsome mouths. Here comes the famous declaration — 'I am Time, the destroyer of worlds; be merely My instrument.' In the end Arjuna begs forgiveness, and the Lord, resuming His gentle form, explains that this rare vision can be attained only through undivided devotion.

 अध्याय सारांश (हिंदी)

गीता का ग्यारहवाँ अध्याय 'विश्वरूपदर्शनयोग' पूरी गीता का सबसे विस्मयकारी प्रसंग है। अर्जुन भगवान से उनका ऐश्वर्यमय विराट रूप देखने की प्रार्थना करता है। साधारण आँखों से यह संभव न होने पर श्रीकृष्ण उसे 'दिव्य चक्षु' देते हैं, और अर्जुन अनन्त मुख-नेत्र-भुजाओं वाला, हजार सूर्यों-सा तेजस्वी, सम्पूर्ण जगत को अपने में समेटे हुए विश्वरूप देखता है। वह भयभीत हो उठता है जब देखता है कि कौरव-वीर भगवान के विकराल मुखों में समाते जा रहे हैं। यहीं भगवान का प्रसिद्ध वचन आता है — 'कालोऽस्मि' अर्थात् 'मैं ही महाकाल हूँ, संसार का संहारक; तू तो केवल निमित्त बन।' अन्त में अर्जुन क्षमा माँगता है, और भगवान फिर सौम्य रूप धारण कर बताते हैं कि यह दुर्लभ दर्शन केवल अनन्य भक्ति से ही संभव है।

Verses

55 verses in total

1 Verse 11.1
अर्जुन उवाच
मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसंज्ञितम्।
यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम।।1।।
English Meaning

Arjuna said: Out of compassion for me You have spoken the supreme secret known as the Self; by it my delusion is gone.

हिंदी अर्थ

अर्जुन बोले: मुझ पर कृपा करके आपने जो परम गोपनीय अध्यात्म-ज्ञान कहा, उससे मेरा यह मोह (अज्ञान) पूरी तरह मिट गया है।

2 Verse 11.2
भवाप्ययौ हि भूतानां श्रुतौ विस्तरशो मया।
त्वत्तः कमलपत्राक्ष माहात्म्यमपि चाव्ययम्।।2।।
English Meaning

O lotus-eyed one, I have heard from You in detail of the origin and dissolution of beings, and also of Your imperishable glory.

हिंदी अर्थ

हे कमलनयन! मैंने आपसे प्राणियों की उत्पत्ति और प्रलय विस्तार से सुने, और आपकी अविनाशी महिमा भी सुनी है।

3 Verse 11.3
एवमेतद्यथात्थ त्वमात्मानं परमेश्वर।
द्रष्टुमिच्छामि ते रूपमैश्वरं पुरुषोत्तम।।3।।
English Meaning

O Supreme Lord, You are just as You declare Yourself to be; yet I long to see Your divine cosmic form, O Supreme Person.

हिंदी अर्थ

हे परमेश्वर! आप अपने को जैसा बताते हैं, वह ठीक वैसा ही है; फिर भी हे पुरुषोत्तम! मैं आपके उस ऐश्वर्यमय रूप को साक्षात् देखना चाहता हूँ।

4 Verse 11.4
मन्यसे यदि तच्छक्यं मया द्रष्टुमिति प्रभो।
योगेश्वर ततो मे त्वं दर्शयात्मानमव्ययम्।।4।।
English Meaning

If You think it possible for me to behold it, O Lord, then, O Master of yoga, reveal to me Your imperishable Self.

हिंदी अर्थ

हे प्रभो! यदि आप मानते हैं कि वह रूप मेरे द्वारा देखा जा सकता है, तो हे योगेश्वर! मुझे अपने उस अविनाशी स्वरूप के दर्शन कराइए।

5 Verse 11.5
श्रीभगवानुवाच
पश्य मे पार्थ रूपाणि शतशोऽथ सहस्रशः।
नानाविधानि दिव्यानि नानावर्णाकृतीनि च।।5।।
English Meaning

The Blessed Lord said: Behold, O Partha, My forms — hundreds and thousands, of many kinds, divine, of various colours and shapes.

हिंदी अर्थ

श्री भगवान बोले: हे पार्थ! अब तू मेरे सैकड़ों-हजारों नाना प्रकार, नाना वर्ण और नाना आकृति वाले दिव्य रूपों को देख।

6 Verse 11.6
पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्विनौ मरुतस्तथा।
बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत।।6।।
English Meaning

Behold the Adityas, the Vasus, the Rudras, the two Ashvins and the Maruts; behold, O Bharata, many wonders never seen before.

हिंदी अर्थ

हे भारत! मुझमें आदित्यों, वसुओं, रुद्रों, अश्विनीकुमारों और मरुद्गणों को देख; और भी बहुत-से पहले कभी न देखे गये आश्चर्य देख।

7 Verse 11.7
इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम्।
मम देहे गुडाकेश यच्चान्यद्द्रष्टुमिच्छसि।।7।।
English Meaning

Behold now, O Gudakesha, the whole universe — moving and unmoving — gathered together in My body, and whatever else you wish to see.

हिंदी अर्थ

हे गुडाकेश! इस मेरे शरीर में एक ही स्थान पर स्थित चराचर सहित सम्पूर्ण जगत को, और जो कुछ और देखना चाहे, अभी देख।

8 Verse 11.8
न तु मां शक्यसे द्रष्टुमनेनैव स्वचक्षुषा।
दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे योगमैश्वरम्।।8।।
English Meaning

But you cannot see Me with your ordinary eyes; so I give you a divine eye — behold My majestic power of yoga.

हिंदी अर्थ

पर तू मुझे अपने इन साधारण नेत्रों से नहीं देख सकता; इसलिए मैं तुझे दिव्य चक्षु देता हूँ — इससे मेरी ईश्वरीय योगशक्ति देख।

9-11 Verse 11.9 – 11.11
सञ्जय उवाच
एवमुक्त्वा ततो राजन्महायोगेश्वरो हरिः।
दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम्।।9।।
अनेकवक्त्रनयनमनेकाद्भुतदर्शनम्।
अनेकदिव्याभरणं दिव्यानेकोद्यतायुधम्।।10।।
दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम्।
सर्वाश्चर्यमयं देवमनन्तं विश्वतोमुखम्।।11।।
English Meaning

Sanjaya said: O King, having spoken thus, the great Lord of yoga, Hari, revealed to Arjuna His supreme cosmic form — with countless mouths and eyes, countless marvellous sights, adorned with many divine ornaments, wielding many divine weapons, wearing divine garlands and garments, anointed with divine fragrances, all-wonderful, infinite, with faces on every side.

हिंदी अर्थ

संजय बोले: हे राजन्! ऐसा कहकर महायोगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अपना परम ऐश्वर्यमय विराट रूप दिखाया — अनेक मुख-नेत्रों वाला, अनेक अद्भुत दृश्यों वाला, अनेक दिव्य आभूषणों और उठाये हुए दिव्य शस्त्रों वाला, दिव्य माला-वस्त्र पहने, दिव्य गन्ध से लिप्त, सब आश्चर्यों से युक्त, अनन्त और सब ओर मुख वाला परमदेव।

12 Verse 11.12
दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता।
यदि भाः सदृशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मनः।।12।।
English Meaning

If the light of a thousand suns were to blaze forth at once in the sky, that might resemble the splendour of that mighty Being.

हिंदी अर्थ

यदि आकाश में हजार सूर्य एक साथ उदय हो जायें, तो उनका प्रकाश भी शायद उस महान विराट रूप के तेज के समान हो।

13 Verse 11.13
तत्रैकस्थं जगत्कृत्स्नं प्रविभक्तमनेकधा।
अपश्यद्देवदेवस्य शरीरे पाण्डवस्तदा।।13।।
English Meaning

There, in the body of the God of gods, Arjuna then beheld the whole universe, divided in many ways, yet gathered in one.

हिंदी अर्थ

उस समय पाण्डुपुत्र अर्जुन ने देवों के देव श्रीकृष्ण के उस शरीर में अनेक प्रकार से विभक्त सम्पूर्ण जगत को एक ही स्थान पर स्थित देखा।

14 Verse 11.14
ततः स विस्मयाविष्टो हृष्टरोमा धनञ्जयः।
प्रणम्य शिरसा देवं कृताञ्जलिरभाषत।।14।।
English Meaning

Then, filled with wonder and his hair standing on end, Dhananjaya bowed his head to the Lord and, with folded hands, spoke.

हिंदी अर्थ

तब आश्चर्य से भरे और रोमांचित अर्जुन ने उस प्रकाशमय विराट रूप को सिर झुकाकर प्रणाम किया और हाथ जोड़कर बोले।

15 Verse 11.15
अर्जुन उवाच
पश्यामि देवांस्तव देव देहे सर्वांस्तथा भूतविशेषसङ्घान्।
ब्रह्माणमीशं कमलासनस्थमृषींश्च सर्वानुरगांश्च दिव्यान्।।15।।
English Meaning

Arjuna said: O Lord, I see in Your body all the gods and hosts of beings, Brahma seated on the lotus, Shiva, all the sages and the divine serpents.

हिंदी अर्थ

अर्जुन बोले: हे देव! मैं आपके शरीर में सब देवताओं को, प्राणियों के समूहों को, कमल-आसन पर बैठे ब्रह्मा को, शिव को, सब ऋषियों को और दिव्य सर्पों को देख रहा हूँ।

16 Verse 11.16
अनेकबाहूदरवक्त्रनेत्रं पश्यामि त्वां सर्वतोऽनन्तरूपम्।
नान्तं न मध्यं न पुनस्तवादिं पश्यामि विश्वेश्वर विश्वरूप।।16।।
English Meaning

O Lord of the universe, I see You with countless arms, bellies, mouths and eyes, infinite in form on every side; I see no beginning, middle or end of You, O cosmic form.

हिंदी अर्थ

हे विश्वेश्वर! मैं आपको अनेक भुजा, उदर, मुख और नेत्रों वाला, सब ओर अनन्त रूप वाला देखता हूँ; हे विश्वरूप! मुझे आपका न आदि दिखता है, न मध्य, न अन्त।

17 Verse 11.17
किरीटिनं गदिनं चक्रिणं च तेजोराशिं सर्वतो दीप्तिमन्तम्।
पश्यामि त्वां दुर्निरीक्ष्यं समन्ताद्दीप्तानलार्कद्युतिमप्रमेयम्।।17।।
English Meaning

I see You crowned, with mace and discus, a mass of radiance shining everywhere, blazing like fire and sun, hard to gaze upon, immeasurable on all sides.

हिंदी अर्थ

मुकुट, गदा और चक्र धारण किये, सब ओर तेज-पुंज, प्रज्वलित अग्नि और सूर्य-सी ज्योति वाले, कठिनता से देखे जाने योग्य और अप्रमेय आपको मैं देखता हूँ।

18 Verse 11.18
त्वमक्षरं परमं वेदितव्यं त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम्।
त्वमव्ययः शाश्वतधर्मगोप्ता सनातनस्त्वं पुरुषो मतो मे।।18।।
English Meaning

You are the supreme Imperishable, the one to be known; You are the supreme refuge of this universe, the guardian of eternal dharma, the everlasting Person — so I believe.

हिंदी अर्थ

आप ही जानने योग्य परम अक्षर (ब्रह्म) हैं, इस जगत के परम आश्रय हैं, सनातन धर्म के रक्षक और अविनाशी सनातन पुरुष हैं — ऐसा मेरा निश्चय है।

19 Verse 11.19
अनादिमध्यान्तमनन्तवीर्यमनन्तबाहुं शशिसूर्यनेत्रम्।
पश्यामि त्वां दीप्तहुताशवक्त्रं स्वतेजसा विश्वमिदं तपन्तम्।।19।।
English Meaning

Without beginning, middle or end, of infinite power, with countless arms, the moon and sun for eyes, a blazing fire for a mouth, scorching this universe with Your radiance — thus I see You.

हिंदी अर्थ

आदि-मध्य-अन्त से रहित, अनन्त सामर्थ्य और अनन्त भुजाओं वाले, चन्द्र-सूर्यरूपी नेत्रों वाले, प्रज्वलित अग्निरूप मुख वाले और अपने तेज से इस जगत को तपाते हुए आपको मैं देखता हूँ।

20 Verse 11.20
द्यावापृथिव्योरिदमन्तरं हि व्याप्तं त्वयैकेन दिशश्च सर्वाः।
दृष्ट्वाद्भुतं रूपमुग्रं तवेदं लोकत्रयं प्रव्यथितं महात्मन्।।20।।
English Meaning

The space between heaven and earth and all the quarters are filled by You alone; seeing this wondrous, terrible form of Yours, the three worlds tremble, O great soul.

हिंदी अर्थ

हे महात्मन्! स्वर्ग और पृथ्वी के बीच का सारा आकाश और सब दिशाएँ केवल आपसे ही भरी हैं; आपके इस अद्भुत और उग्र रूप को देखकर तीनों लोक व्यथित हो रहे हैं।

21 Verse 11.21
अमी हि त्वां सुरसङ्घा विशन्ति केचिद्भीताः प्राञ्जलयो गृणन्ति।
स्वस्तीत्युक्त्वा महर्षिसिद्धसङ्घाः स्तुवन्ति त्वां स्तुतिभिः पुष्कलाभिः।।21।।
English Meaning

Hosts of gods enter into You; some, in fear, praise You with folded hands; and the throngs of great sages and perfected ones, crying 'Hail!', extol You with abundant hymns.

हिंदी अर्थ

वे देव-समूह आप में प्रवेश कर रहे हैं; कुछ भयभीत होकर हाथ जोड़े आपकी स्तुति कर रहे हैं; और महर्षि-सिद्ध 'कल्याण हो' कहकर उत्तम स्तोत्रों से आपका गुणगान कर रहे हैं।

22 Verse 11.22
रुद्रादित्या वसवो ये च साध्या विश्वेऽश्विनौ मरुतश्चोष्मपाश्च।
गन्धर्वयक्षासुरसिद्धसङ्घा वीक्षन्ते त्वां विस्मिताश्चैव सर्वे।।22।।
English Meaning

The Rudras, Adityas, Vasus, Sadhyas, Vishvedevas, the two Ashvins, the Maruts, the ancestors, and the hosts of gandharvas, yakshas, asuras and siddhas — all gaze upon You in amazement.

हिंदी अर्थ

रुद्र, आदित्य, वसु, साध्य, विश्वेदेव, अश्विनीकुमार, मरुद्गण, पितर, तथा गन्धर्व, यक्ष, असुर और सिद्धों के समूह — ये सब विस्मित होकर आपको देख रहे हैं।

23 Verse 11.23
रूपं महत्ते बहुवक्त्रनेत्रं महाबाहो बहुबाहूरुपादम्।
बहूदरं बहुदंष्ट्राकरालं दृष्ट्वा लोकाः प्रव्यथितास्तथाहम्।।23।।
English Meaning

Seeing Your great form, O mighty-armed, with many mouths and eyes, many arms, thighs and feet, many bellies and many fearful tusks — the worlds are terrified, and so am I.

हिंदी अर्थ

हे महाबाहो! आपके अनेक मुख-नेत्रों, अनेक भुजा-जंघा-पैरों, अनेक उदरों और अनेक विकराल दाढ़ों वाले महान रूप को देखकर सब लोक व्याकुल हो रहे हैं, और मैं भी।

24 Verse 11.24
नभःस्पृशं दीप्तमनेकवर्णं व्यात्ताननं दीप्तविशालनेत्रम्।
दृष्ट्वा हि त्वां प्रव्यथितान्तरात्मा धृतिं न विन्दामि शमं च विष्णो।।24।।
English Meaning

Seeing You touching the sky, blazing with many colours, with gaping mouths and great fiery eyes, my inmost self trembles, O Vishnu; I find neither courage nor peace.

हिंदी अर्थ

हे विष्णो! आकाश को छूते, देदीप्यमान, अनेक रंगों वाले, खुले मुख और प्रकाशमान विशाल नेत्रों वाले आपको देखकर मेरा अन्तःकरण भयभीत है; मुझे न धीरज मिलता है न शान्ति।

25 Verse 11.25
दंष्ट्राकरालानि च ते मुखानि दृष्ट्वैव कालानलसन्निभानि।
दिशो न जाने न लभे च शर्म प्रसीद देवेश जगन्निवास।।25।।
English Meaning

Seeing Your mouths, terrible with tusks and blazing like the fire of dissolution, I lose all sense of direction and find no comfort; be gracious, O Lord of gods, abode of the universe!

हिंदी अर्थ

दाढ़ों से विकराल और प्रलयकाल की अग्नि-से दहकते आपके मुखों को देखकर मुझे दिशाओं का भान नहीं रहता और सुख नहीं मिलता; हे देवेश! हे जगन्निवास! आप प्रसन्न होइए।

26-27 Verse 11.26 – 11.27
अमी च त्वां धृतराष्ट्रस्य पुत्राः सर्वे सहैवावनिपालसङ्घैः।
भीष्मो द्रोणः सूतपुत्रस्तथासौ सहास्मदीयैरपि योधमुख्यैः।।26।।
वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति दंष्ट्राकरालानि भयानकानि।
केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषु सन्दृश्यन्ते चूर्णितैरुत्तमाङ्गैः।।27।।
English Meaning

All the sons of Dhritarashtra, with the hosts of kings, and Bhishma, Drona and that Karna, along with our chief warriors too, rush into Your fearful mouths terrible with tusks; some are seen caught between Your teeth, their heads crushed to powder.

हिंदी अर्थ

ये सब धृतराष्ट्र के पुत्र, राजाओं के समूह सहित, और भीष्म, द्रोण तथा वह कर्ण — हमारे प्रमुख योद्धाओं के साथ — आपके दाढ़ों से विकराल भयानक मुखों में वेग से प्रवेश कर रहे हैं; कई तो चूर-चूर सिरों सहित आपके दाँतों के बीच फँसे दिख रहे हैं।

28 Verse 11.28
यथा नदीनां बहवोऽम्बुवेगाः समुद्रमेवाभिमुखा द्रवन्ति।
तथा तवामी नरलोकवीरा विशन्ति वक्त्राण्यभिविज्वलन्ति।।28।।
English Meaning

As the many torrents of rivers rush toward the ocean, so do these heroes of the human world enter Your blazing mouths.

हिंदी अर्थ

जैसे नदियों के अनेक जल-प्रवाह स्वाभाविक ही समुद्र की ओर दौड़ते हैं, वैसे ही ये मनुष्य-लोक के वीर आपके प्रज्वलित मुखों में प्रवेश कर रहे हैं।

29 Verse 11.29
यथा प्रदीप्तं ज्वलनं पतङ्गा विशन्ति नाशाय समृद्धवेगाः।
तथैव नाशाय विशन्ति लोकास्तवापि वक्त्राणि समृद्धवेगाः।।29।।
English Meaning

As moths rush headlong into a blazing flame to their destruction, so do these people rush into Your mouths to their ruin.

हिंदी अर्थ

जैसे पतंगे नष्ट होने के लिए तेजी से जलती आग में कूदते हैं, वैसे ही ये सब लोग अपने विनाश के लिए आपके मुखों में वेग से प्रवेश कर रहे हैं।

30 Verse 11.30
लेलिह्यसे ग्रसमानः समन्ताल्लोकान्समग्रान्वदनैर्ज्वलद्भिः।
तेजोभिरापूर्य जगत्समग्रं भासस्तवोग्राः प्रतपन्ति विष्णो।।30।।
English Meaning

Devouring all the worlds on every side with Your flaming mouths, You lick them up; Your fierce rays fill the whole universe with their heat, O Vishnu.

हिंदी अर्थ

हे विष्णो! आप अपने प्रज्वलित मुखों से सब लोकों को निगलते हुए चारों ओर से चाट रहे हैं; आपका उग्र तेज सम्पूर्ण जगत को व्याप्त कर तपा रहा है।

31 Verse 11.31
आख्याहि मे को भवानुग्ररूपो नमोऽस्तु ते देववर प्रसीद।
विज्ञातुमिच्छामि भवन्तमाद्यं न हि प्रजानामि तव प्रवृत्तिम्।।31।।
English Meaning

Tell me who You are, so terrible in form. Salutations to You, O best of gods; be gracious. I wish to know You, the primeval One, for I do not understand Your purpose.

हिंदी अर्थ

मुझे बताइए — उग्र रूप वाले आप कौन हैं? हे देवश्रेष्ठ! आपको नमस्कार; प्रसन्न होइए। हे आदिपुरुष! मैं आपको ठीक से जानना चाहता हूँ, क्योंकि आपकी इस प्रवृत्ति को मैं नहीं समझ पा रहा।

32 Verse 11.32
श्रीभगवानुवाच
कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः।
ऋतेऽपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे येऽवस्थिताः प्रत्यनीकेषु योधाः।।32।।
English Meaning

The Blessed Lord said: I am Time, the mighty destroyer of worlds, here engaged in annihilating them. Even without you, all these warriors arrayed against you shall cease to be.

हिंदी अर्थ

श्री भगवान बोले: मैं लोकों का संहार करने वाला, बढ़ा हुआ महाकाल हूँ; इस समय इन लोकों को समेटने में प्रवृत्त हूँ। प्रतिपक्ष में खड़े ये योद्धा तेरे (युद्ध) बिना भी नहीं बचेंगे।

33 Verse 11.33
तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ यशो लभस्व जित्वा शत्रून्भुङ्क्ष्व राज्यं समृद्धम्।
मयैवैते निहताः पूर्वमेव निमित्तमात्रं भव सव्यसाचिन्।।33।।
English Meaning

Therefore arise, win glory; conquer the foes and enjoy a prosperous kingdom. These have already been slain by Me; be merely the instrument, O Savyasachin.

हिंदी अर्थ

इसलिए तू उठ, यश पा, और शत्रुओं को जीतकर समृद्ध राज्य भोग। ये सब पहले ही मेरे द्वारा मारे जा चुके हैं; हे सव्यसाची! तू तो केवल निमित्तमात्र बन।

34 Verse 11.34
द्रोणं च भीष्मं च जयद्रथं च कर्णं तथान्यानपि योधवीरान्।
मया हतांस्त्वं जहि मा व्यथिष्ठा युध्यस्व जेतासि रणे सपत्नान्।।34।।
English Meaning

Drona, Bhishma, Jayadratha, Karna and the other brave warriors — already slain by Me — slay them; do not waver. Fight! You shall conquer your foes in battle.

हिंदी अर्थ

द्रोण, भीष्म, जयद्रथ, कर्ण और अन्य वीर योद्धा — जो मेरे द्वारा पहले ही मारे जा चुके हैं — उन्हें तू मार; भय मत कर, युद्ध कर; तू रण में शत्रुओं को अवश्य जीतेगा।

35 Verse 11.35
सञ्जय उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचनं केशवस्य कृताञ्जलिर्वेपमानः किरीटी।
नमस्कृत्वा भूय एवाह कृष्णं सगद्गदं भीतभीतः प्रणम्य।।35।।
English Meaning

Sanjaya said: Hearing these words of Keshava, the crowned Arjuna, trembling, with folded hands bowed again; and overcome with fear, in a faltering voice he spoke to Krishna.

हिंदी अर्थ

संजय बोले: केशव के इस वचन को सुनकर मुकुटधारी अर्जुन हाथ जोड़े, काँपते हुए नमस्कार करके, अत्यन्त भयभीत होकर प्रणामपूर्वक गद्गद वाणी से श्रीकृष्ण से बोले।

36 Verse 11.36
अर्जुन उवाच
स्थाने हृषीकेश तव प्रकीर्त्या जगत्प्रहृष्यत्यनुरज्यते च।
रक्षांसि भीतानि दिशो द्रवन्ति सर्वे नमस्यन्ति च सिद्धसङ्घाः।।36।।
English Meaning

Arjuna said: It is right, O Hrishikesha, that the world rejoices and delights in Your praise; the frightened demons flee in all directions, and the hosts of the perfected ones bow to You.

हिंदी अर्थ

अर्जुन बोले: हे हृषीकेश! यह उचित ही है कि आपके कीर्तन से जगत हर्षित और अनुरक्त हो रहा है; भयभीत राक्षस दिशाओं में भाग रहे हैं और सिद्धगण आपको नमस्कार कर रहे हैं।

37 Verse 11.37
कस्माच्च ते न नमेरन्महात्मन्गरीयसे ब्रह्मणोऽप्यादिकर्त्रे।
अनन्त देवेश जगन्निवास त्वमक्षरं सदसत्तत्परं यत्।।37।।
English Meaning

And why should they not bow to You, O great soul, greater even than Brahma, the first creator? O Infinite, O Lord of gods, O abode of the universe, You are the existent, the non-existent, and that which is beyond — the Imperishable.

हिंदी अर्थ

हे महात्मन्! वे आपको नमस्कार क्यों न करें — आप जो ब्रह्मा के भी आदिकर्ता और सबसे महान हैं! हे अनन्त! हे देवेश! हे जगन्निवास! सत्, असत् और उससे परे जो अक्षर (ब्रह्म) है, वह आप ही हैं।

38 Verse 11.38
त्वमादिदेवः पुरुषः पुराणस्त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम्।
वेत्तासि वेद्यं च परं च धाम त्वया ततं विश्वमनन्तरूप।।38।।
English Meaning

You are the first of gods, the ancient Person, the supreme refuge of this universe; the knower, the object of knowledge, and the supreme abode; by You the universe is pervaded, O boundless form.

हिंदी अर्थ

आप आदिदेव और सनातन पुरुष हैं, इस जगत के परम आश्रय, जानने वाले और जानने योग्य तथा परम धाम हैं; हे अनन्तरूप! आपसे यह सारा जगत व्याप्त है।

39 Verse 11.39
वायुर्यमोऽग्निर्वरुणः शशाङ्कः प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्च।
नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोऽपि नमो नमस्ते।।39।।
English Meaning

You are Vayu, Yama, Agni, Varuna, the moon, the Lord of creatures and the great-grandsire; salutations to You a thousand times, again and again salutations!

हिंदी अर्थ

आप वायु, यम, अग्नि, वरुण, चन्द्रमा, प्रजापति ब्रह्मा और ब्रह्मा के भी पिता हैं; आपको हजारों बार नमस्कार, फिर-फिर बार-बार नमस्कार!

40 Verse 11.40
नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व।
अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वं सर्वं समाप्नोषि ततोऽसि सर्वः।।40।।
English Meaning

Salutations to You from before and behind, and from every side, O All! Of infinite power and boundless might, You pervade all; therefore You are all.

हिंदी अर्थ

हे सर्वस्वरूप! आपको आगे से, पीछे से और सब ओर से नमस्कार; हे अनन्त सामर्थ्य वाले! आप अनन्त पराक्रमी होकर सब कुछ व्याप्त किये हुए हैं, इसलिए आप ही सर्वरूप हैं।

41-42 Verse 11.41 – 11.42
सखेति मत्वा प्रसभं यदुक्तं हे कृष्ण हे यादव हे सखेति।
अजानता महिमानं तवेदं मया प्रमादात्प्रणयेन वापि।।41।।
यच्चावहासार्थमसत्कृतोऽसि विहारशय्यासनभोजनेषु।
एकोऽथवाप्यच्युत तत्समक्षं तत्क्षामये त्वामहमप्रमेयम्।।42।।
English Meaning

Not knowing this greatness of Yours, thinking You merely my friend, from affection or carelessness I called You 'O Krishna', 'O Yadava', 'O friend' — and whatever disrespect I showed You in jest, at play, resting, sitting or dining, alone or before others — for all that, O immeasurable One, I beg Your forgiveness.

हिंदी अर्थ

आपके इस प्रभाव को न जानकर, 'आप मेरे सखा हैं' मानकर, प्रेम या प्रमाद से मैंने जो 'हे कृष्ण!', 'हे यादव!', 'हे सखे!' कहकर बिना सोचे कहा; और हे अच्युत! हँसी-विनोद में, खेलते, लेटते, बैठते या भोजन करते समय — अकेले या औरों के सामने — जो आपका अनादर किया, उन सब अपराधों के लिए मैं अप्रमेय आपसे क्षमा माँगता हूँ।

43 Verse 11.43
पितासि लोकस्य चराचरस्य त्वमस्य पूज्यश्च गुरुर्गरीयान्।
न त्वत्समोऽस्त्यभ्यधिकः कुतोऽन्यो लोकत्रयेऽप्यप्रतिमप्रभाव।।43।।
English Meaning

You are the father of this world of moving and unmoving things, its worshipful and most venerable teacher; none is equal to You in the three worlds, O peerless in power — how then could any be greater?

हिंदी अर्थ

आप इस चराचर जगत के पिता, सबसे बड़े गुरु और परम पूज्य हैं; हे अनुपम प्रभाव वाले! तीनों लोकों में आपके समान भी कोई नहीं, फिर आपसे बढ़कर तो कैसे होगा।

44 Verse 11.44
तस्मात्प्रणम्य प्रणिधाय कायं प्रसादये त्वामहमीशमीड्यम्।
पितेव पुत्रस्य सखेव सख्युः प्रियः प्रियायार्हसि देव सोढुम्।।44।।
English Meaning

Therefore, bowing down and prostrating my body, I seek Your grace, O adorable Lord; bear with me as a father bears with a son, a friend with a friend, a lover with the beloved, O God.

हिंदी अर्थ

इसलिए हे प्रभो! शरीर को चरणों में झुकाकर, प्रणाम करके मैं स्तुत्य आप ईश्वर को प्रसन्न करना चाहता हूँ; जैसे पिता पुत्र के, सखा सखा के और प्रियतम प्रिया के अपराध सहता है, वैसे ही आप मेरे अपराध सह लें।

45 Verse 11.45
अदृष्टपूर्वं हृषितोऽस्मि दृष्ट्वा भयेन च प्रव्यथितं मनो मे।
तदेव मे दर्शय देवरूपं प्रसीद देवेश जगन्निवास।।45।।
English Meaning

I rejoice at seeing this form never seen before, yet my mind is troubled with fear; show me again that gentle divine form of Yours, be gracious, O Lord of gods, abode of the universe.

हिंदी अर्थ

पहले कभी न देखे इस रूप को देखकर मैं हर्षित हूँ, पर मेरा मन भय से व्याकुल भी है; इसलिए हे देवेश! हे जगन्निवास! मुझे अपना वही (सौम्य) देवरूप दिखाइए; प्रसन्न होइए।

46 Verse 11.46
किरीटिनं गदिनं चक्रहस्तमिच्छामि त्वां द्रष्टुमहं तथैव।
तेनैव रूपेण चतुर्भुजेन सहस्रबाहो भव विश्वमूर्ते।।46।।
English Meaning

I wish to see You as before — crowned, with mace and discus in hand; assume again that four-armed form, O thousand-armed cosmic One.

हिंदी अर्थ

मैं आपको वैसे ही — मुकुट धारण किये, गदा और चक्र हाथ में लिए — देखना चाहता हूँ; इसलिए हे विश्वरूप! हे सहस्रबाहो! आप उसी चतुर्भुज रूप में प्रकट होइए।

47 Verse 11.47
श्रीभगवानुवाच
मया प्रसन्नेन तवार्जुनेदं रूपं परं दर्शितमात्मयोगात्।
तेजोमयं विश्वमनन्तमाद्यं यन्मे त्वदन्येन न दृष्टपूर्वम्।।47।।
English Meaning

The Blessed Lord said: Graciously, by My own power of yoga, I have shown you, O Arjuna, this supreme, radiant, primal and infinite cosmic form, which none but you has ever seen before.

हिंदी अर्थ

श्री भगवान बोले: हे अर्जुन! प्रसन्न होकर मैंने अपनी योगशक्ति से यह परम तेजोमय, सबका आदि और अनन्त विराट रूप तुझे दिखाया, जिसे तेरे सिवा किसी ने पहले नहीं देखा।

48 Verse 11.48
न वेदयज्ञाध्ययनैर्न दानैर्न च क्रियाभिर्न तपोभिरुग्रैः।
एवंरूपः शक्य अहं नृलोके द्रष्टुं त्वदन्येन कुरुप्रवीर।।48।।
English Meaning

Not by study of the Vedas or sacrifices, not by gifts, not by rites or severe austerities can I be seen in this form in the world of men by anyone but you, O hero of the Kurus.

हिंदी अर्थ

हे कुरुप्रवीर! मनुष्य-लोक में ऐसे विराट रूप वाला मैं न वेद-यज्ञ के अध्ययन से, न दान से, न क्रियाओं से, न उग्र तपों से — तेरे सिवा किसी और के द्वारा देखा जा सकता हूँ।

49 Verse 11.49
मा ते व्यथा मा च विमूढभावो दृष्ट्वा रूपं घोरमीदृङ्ममेदम्।
व्यपेतभीः प्रीतमनाः पुनस्त्वं तदेव मे रूपमिदं प्रपश्य।।49।।
English Meaning

Let not fear or bewilderment seize you at seeing this terrible form of Mine; free from fear and glad at heart, behold again that familiar form of Mine.

हिंदी अर्थ

मेरे इस विकराल रूप को देखकर तुझे न व्याकुलता हो न मूढ़ता; भयरहित और प्रसन्न मन होकर अब तू मेरे उसी (सौम्य चतुर्भुज) रूप को फिर देख।

50 Verse 11.50
सञ्जय उवाच
इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा स्वकं रूपं दर्शयामास भूयः।
आश्वासयामास च भीतमेनं भूत्वा पुनः सौम्यवपुर्महात्मा।।50।।
English Meaning

Sanjaya said: Having spoken thus to Arjuna, Vasudeva again revealed His own form; and assuming once more His gentle shape, the great soul consoled the frightened Arjuna.

हिंदी अर्थ

संजय बोले: अर्जुन से ऐसा कहकर वासुदेव ने फिर अपना (चतुर्भुज) रूप दिखाया, और सौम्य रूप धारण कर महात्मा श्रीकृष्ण ने भयभीत अर्जुन को धीरज बँधाया।

51 Verse 11.51
अर्जुन उवाच
दृष्ट्वेदं मानुषं रूपं तव सौम्यं जनार्दन।
इदानीमस्मि संवृत्तः सचेताः प्रकृतिं गतः।।51।।
English Meaning

Arjuna said: Seeing this gentle human form of Yours, O Janardana, I am now composed and restored to my own nature.

हिंदी अर्थ

अर्जुन बोले: हे जनार्दन! आपके इस शान्त मनुष्य-रूप को देखकर अब मैं स्थिरचित्त और अपनी स्वाभाविक अवस्था में आ गया हूँ।

52 Verse 11.52
श्रीभगवानुवाच
सुदुर्दर्शमिदं रूपं दृष्टवानसि यन्मम।
देवा अप्यस्य रूपस्य नित्यं दर्शनकाङ्क्षिणः।।52।।
English Meaning

The Blessed Lord said: This form of Mine that you have seen is very hard to behold; even the gods constantly long to see it.

हिंदी अर्थ

श्री भगवान बोले: मेरा जो (चतुर्भुज) रूप तूने देखा, उसके दर्शन अत्यन्त दुर्लभ हैं; देवता भी सदा इस रूप के दर्शन की चाह रखते हैं।

53 Verse 11.53
नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन न चेज्यया।
शक्य एवंविधो द्रष्टुं दृष्टवानसि मां यथा।।53।।
English Meaning

Not by the Vedas, nor by austerity, nor by charity, nor by sacrifice can I be seen in the form in which you have seen Me.

हिंदी अर्थ

जैसा तूने मुझे देखा, वैसा रूप न वेदों से, न तप से, न दान से और न यज्ञ से देखा जा सकता है।

54 Verse 11.54
भक्त्या त्वनन्यया शक्य अहमेवंविधोऽर्जुन।
ज्ञातुं द्रष्टुं च तत्त्वेन प्रवेष्टुं च परन्तप।।54।।
English Meaning

But by undivided devotion alone, O Arjuna, can I, in this form, be truly known, seen and entered into, O scorcher of foes.

हिंदी अर्थ

किन्तु हे परंतप अर्जुन! अनन्य भक्ति से ही इस रूप वाला मैं तत्त्व से जाना, साक्षात् देखा और (एकीभाव से) प्राप्त किया जा सकता हूँ।

55 Verse 11.55
मत्कर्मकृन्मत्परमो मद्भक्तः सङ्गवर्जितः।
निर्वैरः सर्वभूतेषु यः स मामेति पाण्डव।।55।।
English Meaning

One who works for Me, holds Me as supreme, is devoted to Me, free from attachment and without enmity toward any being — he comes to Me, O Pandava.

हिंदी अर्थ

हे पाण्डव! जो मेरे ही लिए कर्म करता है, मुझे ही परम मानता है, मेरा भक्त है, आसक्ति-रहित है और सब प्राणियों से वैर-रहित है — वह मुझे ही प्राप्त होता है।

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