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|| Bhagavad Gita ||

सांख्ययोग

Sankhya Yog
The Yoga of Knowledge
📜 72 Verses 📖 Chapter 2
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 Chapter Summary

The second chapter of the Bhagavad Gita, "Sankhya Yoga", is regarded as the essence of the whole Gita. To the grief-stricken Arjuna, Krishna first imparts the knowledge of the immortality of the soul — the soul is never born and never dies; only the body changes, as one discards old clothes for new. He then shows that, as a kshatriya, fighting a righteous war is Arjuna's duty, and gives the famous teaching of Karma Yoga — 'You have a right to action alone, never to its fruits.' The chapter ends with the marks of the sthitaprajna — one who, rising above pleasure and pain, attachment and aversion, rests content in the Self and attains supreme peace.

 अध्याय सारांश (हिंदी)

भगवद्गीता का दूसरा अध्याय "सांख्ययोग" पूरी गीता का सार माना जाता है। शोक में डूबे अर्जुन को श्रीकृष्ण सबसे पहले आत्मा की अमरता का ज्ञान देते हैं — आत्मा न जन्मती है न मरती है, केवल शरीर बदलता है, जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र त्यागकर नये धारण करता है। फिर वे क्षत्रिय-धर्म के अनुसार युद्ध को कर्तव्य बताते हैं और कर्मयोग का प्रसिद्ध उपदेश देते हैं — 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन'। अध्याय के अंत में 'स्थितप्रज्ञ' के लक्षण बताये गये हैं — जो सुख-दुःख और राग-द्वेष से ऊपर उठकर आत्मा में संतुष्ट रहता है और परम शान्ति प्राप्त करता है।

Verses

72 verses in total

1 Verse 2.1
संजय उवाच
तं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम्।
विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः।।1।।
English Meaning

Sanjaya said: To him thus overcome with pity, his eyes filled with tears and distressed, grief-stricken, Madhusudana (Krishna) spoke these words.

हिंदी अर्थ

संजय बोले: करुणा से व्याप्त, आँसुओं से पूर्ण तथा व्याकुल नेत्रों वाले शोकयुक्त उस अर्जुन के प्रति भगवान मधुसूदन ने ये वचन कहे।

2-3 Verse 2.2 – 2.3
श्रीभगवानुवाच
कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम्।
अनार्यजुष्टमस्वर्ग्यमकीर्तिकरमर्जुन।।2।।
क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते।
क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप।।3।।
English Meaning

The Blessed Lord said: O Arjuna, whence has this dejection come upon you at this critical hour? It is unworthy of noble men and leads neither to heaven nor to glory. Yield not to unmanliness, O Partha; it does not become you. Cast off this petty faint-heartedness and arise, O scorcher of foes.

हिंदी अर्थ

श्री भगवान बोले: हे अर्जुन! तुझे इस असमय में यह मोह किस हेतु से प्राप्त हुआ? न यह श्रेष्ठ पुरुषों द्वारा आचरित है, न स्वर्ग देने वाला है और न कीर्ति करने वाला। इसलिए हे अर्जुन! नपुंसकता को मत प्राप्त हो, यह तुझमें उचित नहीं। हे परंतप! हृदय की तुच्छ दुर्बलता त्यागकर युद्ध के लिए खड़ा हो जा।

4 Verse 2.4
अर्जुन उवाच
कथं भीष्ममहं संख्ये द्रोणं च मधुसूदन।
इषुभिः प्रतियोत्स्यामि पूजार्हावरिसूदन।।4।।
English Meaning

Arjuna said: O Madhusudana, how shall I fight with arrows against Bhishma and Drona, who are worthy of my worship, O slayer of foes?

हिंदी अर्थ

अर्जुन बोले: हे मधुसूदन! मैं रणभूमि में किस प्रकार बाणों से भीष्म और द्रोणाचार्य के विरुद्ध लड़ूँगा? हे अरिसूदन! वे दोनों ही पूजनीय हैं।

5 Verse 2.5
गुरूनहत्वा हि महानुभावान्
श्रेयो भोक्तुं भैक्ष्यमपीह लोके।
हत्वार्थकामांस्तु गुरूनिहैव
भुञ्जीय भोगान् रुधिरप्रदिग्धान्।।5।।
English Meaning

It would be better to live on alms than to slay these noble elders; for by killing them I would enjoy only pleasures and wealth stained with their blood.

हिंदी अर्थ

इन महानुभाव गुरुजनों को न मारकर मैं इस लोक में भिक्षा का अन्न खाना भी श्रेयस्कर समझता हूँ; क्योंकि गुरुजनों को मारकर भी रुधिर से सने हुए अर्थ और भोगों को ही तो भोगूँगा।

6 Verse 2.6
न चैतद्विद्मः कतरन्नो गरीयो
यद्वा जयेम यदि वा नो जयेयुः।
यानेव हत्वा न जिजीविषाम-
स्तेऽवस्थिताः प्रमुखे धार्तराष्ट्राः।।6।।
English Meaning

Nor do we know which is better — to conquer them or be conquered. The very sons of Dhritarashtra, after slaying whom we would not wish to live, stand arrayed against us.

हिंदी अर्थ

हम यह भी नहीं जानते कि हमारे लिए युद्ध करना या न करना श्रेष्ठ है, अथवा यह कि उन्हें हम जीतेंगे या वे हमें। जिनको मारकर हम जीना भी नहीं चाहते, वे ही धृतराष्ट्र के पुत्र हमारे सामने खड़े हैं।

7 Verse 2.7
कार्पण्यदोषोपहतस्वभावः
पृच्छामि त्वां धर्मसम्मूढचेताः।
यच्छ्रेयः स्यान्निश्चितं ब्रूहि तन्मे
शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम्।।7।।
English Meaning

My nature overpowered by faint-heartedness, my mind confused about duty, I ask You: tell me decisively what is best. I am Your disciple; instruct me, who have taken refuge in You.

हिंदी अर्थ

कायरतारूप दोष से उपहत स्वभाव वाला तथा धर्म के विषय में मोहितचित्त हुआ मैं आपसे पूछता हूँ — जो निश्चित कल्याणकारक हो वह मुझे कहिए; मैं आपका शिष्य हूँ, शरण में आये हुए मुझको शिक्षा दीजिए।

8 Verse 2.8
न हि प्रपश्यामि ममापनुद्या-
द्यच्छोकमुच्छोषणमिन्द्रियाणाम्।
अवाप्य भूमावसपत्नमृद्धं
राज्यं सुराणामपि चाधिपत्यम्।।8।।
English Meaning

I do not see what could dispel this grief that withers my senses, even if I were to gain unrivalled dominion over the earth and even lordship over the gods.

हिंदी अर्थ

भूमि पर निष्कण्टक, धन-धान्य-सम्पन्न राज्य और देवताओं का स्वामीपन पाकर भी मैं वह उपाय नहीं देखता जो मेरी इन्द्रियों को सुखाने वाले इस शोक को दूर कर सके।

9 Verse 2.9
संजय उवाच
एवमुक्त्वा हृषीकेशं गुडाकेशः परन्तप।
न योत्स्य इति गोविन्दमुक्त्वा तूष्णीं बभूव ह।।9।।
English Meaning

Sanjaya said: O Parantapa, having spoken thus to Hrishikesha, Gudakesha (Arjuna) said to Govinda, 'I shall not fight,' and fell silent.

हिंदी अर्थ

संजय बोले: हे राजन! निद्राविजयी अर्जुन अन्तर्यामी श्रीकृष्ण से इस प्रकार कहकर, 'युद्ध नहीं करूँगा' स्पष्ट कहकर चुप हो गये।

10 Verse 2.10
तमुवाच हृषीकेशः प्रहसन्निव भारत।
सेनयोरुभयोर्मध्ये विषीदन्तमिदं वचः।।10।।
English Meaning

O Bharata, to him grieving between the two armies, Hrishikesha, as if smiling, spoke these words.

हिंदी अर्थ

हे भरतवंशी! दोनों सेनाओं के बीच शोक करते हुए उस अर्जुन से अन्तर्यामी श्रीकृष्ण ने हँसते हुए-से ये वचन कहे।

11 Verse 2.11
श्रीभगवानुवाच
अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे।
गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः।।11।।
English Meaning

The Blessed Lord said: You grieve for those who should not be grieved for, yet you speak words of wisdom. The wise grieve neither for the living nor for the dead.

हिंदी अर्थ

श्री भगवान बोले: हे अर्जुन! तू न शोक करने योग्य के लिए शोक करता है और पण्डितों जैसे वचन कहता है; परन्तु जिनके प्राण चले गये उनके लिए और जो जीवित हैं उनके लिए भी पण्डितजन शोक नहीं करते।

12 Verse 2.12
न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः।
न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम्।।12।।
English Meaning

Never was there a time when I did not exist, nor you, nor these kings; nor shall any of us ever cease to be hereafter.

हिंदी अर्थ

न ऐसा है कि मैं किसी काल में नहीं था, तू नहीं था या ये राजा नहीं थे; और न ऐसा कि इससे आगे हम सब नहीं रहेंगे।

13 Verse 2.13
देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा।
तथा देहान्तरप्राप्तिर्धीरस्तत्र न मुह्यति।।13।।
English Meaning

Just as the embodied soul passes through childhood, youth and old age in this body, so does it pass into another body; the wise are not deluded by this.

हिंदी अर्थ

जैसे जीवात्मा की इस देह में बालकपन, जवानी और वृद्धावस्था होती है, वैसे ही अन्य शरीर की प्राप्ति होती है; धीर पुरुष इसमें मोहित नहीं होता।

14 Verse 2.14
मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः।
आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत।।14।।
English Meaning

O son of Kunti, the contacts of the senses give rise to cold and heat, pleasure and pain; they come and go and are impermanent. Endure them bravely, O Bharata.

हिंदी अर्थ

हे कुन्तीपुत्र! सर्दी-गर्मी, सुख-दुःख देने वाले इन्द्रिय-विषयों के संयोग उत्पत्ति-विनाशशील और अनित्य हैं; इसलिए हे भारत! इन्हें सहन कर।

15 Verse 2.15
यं हि न व्यथयन्त्येते पुरुषं पुरुषर्षभ।
समदुःखसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते।।15।।
English Meaning

O best of men, the wise one whom these contacts do not afflict, steady in pleasure and pain alike, becomes fit for immortality.

हिंदी अर्थ

हे पुरुषश्रेष्ठ! सुख-दुःख को समान समझने वाले जिस धीर पुरुष को ये संयोग व्याकुल नहीं करते, वह मोक्ष के योग्य होता है।

16 Verse 2.16
नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः।
उभयोरपि दृष्टोऽन्तस्त्वनयोस्तत्त्वदर्शिभिः।।16।।
English Meaning

The unreal has no existence, and the real never ceases to be; the truth of both has been perceived by the seers of reality.

हिंदी अर्थ

असत् वस्तु की सत्ता नहीं है और सत् का अभाव नहीं है। तत्त्वज्ञानी पुरुषों द्वारा इन दोनों का तत्त्व देखा गया है।

17 Verse 2.17
अविनाशि तु तद्विद्धि येन सर्वमिदं ततम्।
विनाशमव्ययस्यास्य न कश्चित्कर्तुमर्हति।।17।।
English Meaning

Know that to be indestructible by which all this is pervaded. None can destroy this imperishable Reality.

हिंदी अर्थ

नाशरहित उसको जान, जिससे यह सम्पूर्ण जगत व्याप्त है। इस अविनाशी का विनाश करने में कोई समर्थ नहीं।

18 Verse 2.18
अन्तवन्त इमे देहा नित्यस्योक्ताः शरीरिणः।
अनाशिनोऽप्रमेयस्य तस्माद्युध्यस्व भारत।।18।।
English Meaning

These bodies of the eternal, indestructible, immeasurable soul are said to have an end. Therefore fight, O Bharata.

हिंदी अर्थ

इस नाशरहित, अप्रमेय, नित्य जीवात्मा के ये सब शरीर नाशवान कहे गये हैं। इसलिए हे भरतवंशी अर्जुन! तू युद्ध कर।

19 Verse 2.19
य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम्।
उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते।।19।।
English Meaning

He who thinks the soul a slayer, and he who thinks it slain — both fail to understand; the soul neither slays nor is slain.

हिंदी अर्थ

जो इस आत्मा को मारने वाला समझता है और जो इसे मरा मानता है, वे दोनों ही नहीं जानते; यह आत्मा न किसी को मारता है न मारा जाता है।

20 Verse 2.20
न जायते म्रियते वा कदाचिन्
नायं भूत्वा भविता वा न भूयः।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो
न हन्यते हन्यमाने शरीरे।।20।।
English Meaning

The soul is never born, nor does it die; nor having been, does it cease to be. Unborn, eternal, everlasting and ancient, it is not slain when the body is slain.

हिंदी अर्थ

यह आत्मा न जन्मता है न मरता है, न यह उत्पन्न होकर फिर होने वाला है; यह अजन्मा, नित्य, सनातन और पुरातन है। शरीर के मारे जाने पर भी यह नहीं मारा जाता।

21 Verse 2.21
वेदाविनाशिनं नित्यं य एनमजमव्ययम्।
कथं स पुरुषः पार्थ कं घातयति हन्ति कम्।।21।।
English Meaning

O Partha, how can one who knows the soul to be indestructible, eternal, unborn and imperishable slay anyone or cause anyone to be slain?

हिंदी अर्थ

हे पार्थ! जो पुरुष इस आत्मा को नाशरहित, नित्य, अजन्मा और अव्यय जानता है, वह कैसे किसी को मरवाता और कैसे किसी को मारता है?

22 Verse 2.22
वासांसि जीर्णानि यथा विहाय
नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि।
तथा शरीराणि विहाय जीर्णा-
न्यन्यानि संयाति नवानि देही।।22।।
English Meaning

As a person casts off worn-out garments and puts on new ones, so the embodied soul casts off worn-out bodies and enters new ones.

हिंदी अर्थ

जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र त्यागकर नये वस्त्र ग्रहण करता है, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीर त्यागकर दूसरे नये शरीर प्राप्त करता है।

23 Verse 2.23
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः।।23।।
English Meaning

Weapons cannot cut the soul, fire cannot burn it, water cannot wet it, and wind cannot dry it.

हिंदी अर्थ

इस आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकते, आग जला नहीं सकती, जल गला नहीं सकता और वायु सुखा नहीं सकती।

24 Verse 2.24
अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च।
नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः।।24।।
English Meaning

This soul is uncleavable, incombustible, neither wettable nor dryable; eternal, all-pervading, stable, immovable and everlasting.

हिंदी अर्थ

यह आत्मा अच्छेद्य, अदाह्य, अक्लेद्य और अशोष्य है; तथा नित्य, सर्वव्यापी, अचल, स्थिर और सनातन है।

25 Verse 2.25
अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते।
तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि।।25।।
English Meaning

This soul is said to be unmanifest, inconceivable and unchanging. Knowing it thus, you ought not to grieve.

हिंदी अर्थ

यह आत्मा अव्यक्त, अचिन्त्य और विकाररहित कहा जाता है। इसलिए हे अर्जुन! इसे इस प्रकार जानकर तू शोक करने के योग्य नहीं है।

26 Verse 2.26
अथ चैनं नित्यजातं नित्यं वा मन्यसे मृतम्।
तथापि त्वं महाबाहो नैवं शोचितुमर्हसि।।26।।
English Meaning

Even if you think the soul to be constantly born and dying, even then, O mighty-armed one, you should not grieve thus.

हिंदी अर्थ

और यदि तू इस आत्मा को सदा जन्मने और सदा मरने वाला मानता है, तो भी हे महाबाहो! तू इस प्रकार शोक करने के योग्य नहीं है।

27 Verse 2.27
जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च।
तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि।।27।।
English Meaning

For death is certain for the born and birth is certain for the dead. Therefore you should not grieve over the unavoidable.

हिंदी अर्थ

जन्मे हुए की मृत्यु निश्चित है और मरे हुए का जन्म निश्चित है। इसलिए इस अपरिहार्य विषय में भी तू शोक करने के योग्य नहीं है।

28 Verse 2.28
अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत।
अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना।।28।।
English Meaning

All beings are unmanifest before birth and unmanifest after death; manifest only in between, O Bharata. What occasion is there for grief?

हिंदी अर्थ

हे भारत! सम्पूर्ण प्राणी जन्म से पहले अप्रकट थे और मरने के बाद भी अप्रकट हो जायेंगे, केवल बीच में प्रकट हैं; फिर इसमें शोक कैसा?

29 Verse 2.29
आश्चर्यवत्पश्यति कश्चिदेन-
माश्चर्यवद्वदति तथैव चान्यः।
आश्चर्यवच्चैनमन्यः शृणोति
श्रुत्वाप्येनं वेद न चैव कश्चित्।।29।।
English Meaning

One sees the soul as a wonder, another speaks of it as a wonder, another hears of it as a wonder; yet even after hearing, none truly knows it.

हिंदी अर्थ

कोई इस आत्मा को आश्चर्य की भाँति देखता है, कोई आश्चर्य की भाँति वर्णन करता है और कोई आश्चर्य की भाँति सुनता है; और कोई-कोई तो सुनकर भी इसे नहीं जानता।

30 Verse 2.30
देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत।
तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि।।30।।
English Meaning

The soul in the body of every being is ever indestructible, O Bharata. Therefore you should not grieve for any creature.

हिंदी अर्थ

हे भारत! यह आत्मा सबके शरीरों में सदा ही अवध्य है। इसलिए सम्पूर्ण प्राणियों के लिए तू शोक करने के योग्य नहीं है।

31 Verse 2.31
स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि।
धर्म्याद्धि युद्धाच्छ्रेयोऽन्यत्क्षत्रियस्य न विद्यते।।31।।
English Meaning

Considering your own duty too, you should not waver; there is nothing better for a warrior than a righteous war.

हिंदी अर्थ

अपने धर्म को देखकर भी तू विचलित होने योग्य नहीं है; क्योंकि क्षत्रिय के लिए धर्मयुक्त युद्ध से बढ़कर कोई कल्याणकारी कर्तव्य नहीं है।

32 Verse 2.32
यदृच्छया चोपपन्नं स्वर्गद्वारमपावृतम्।
सुखिनः क्षत्रियाः पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम्।।32।।
English Meaning

Happy are the warriors, O Partha, who obtain such a war, come of itself as an open gateway to heaven.

हिंदी अर्थ

हे पार्थ! अपने आप प्राप्त हुए, खुले हुए स्वर्ग के द्वाररूप ऐसे युद्ध को भाग्यवान क्षत्रिय ही पाते हैं।

33 Verse 2.33
अथ चेत्त्वमिमं धर्म्यं संग्रामं न करिष्यसि।
ततः स्वधर्मं कीर्तिं च हित्वा पापमवाप्स्यसि।।33।।
English Meaning

But if you will not wage this righteous war, then, forsaking duty and honour, you will incur sin.

हिंदी अर्थ

किन्तु यदि तू इस धर्मयुक्त युद्ध को नहीं करेगा, तो स्वधर्म और कीर्ति खोकर पाप को प्राप्त होगा।

34 Verse 2.34
अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम्।
सम्भावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते।।34।।
English Meaning

People will recount your lasting disgrace; and for the honoured, dishonour is worse than death.

हिंदी अर्थ

सब लोग तेरी बहुत काल तक रहने वाली अपकीर्ति कहेंगे; और माननीय पुरुष के लिए अपकीर्ति मरण से भी बढ़कर है।

35 Verse 2.35
भयाद्रणादुपरतं मंस्यन्ते त्वां महारथाः।
येषां च त्वं बहुमतो भूत्वा यास्यसि लाघवम्।।35।।
English Meaning

The great warriors will think you withdrew from battle out of fear; those who esteemed you will hold you cheap.

हिंदी अर्थ

जिनकी दृष्टि में तू पहले सम्मानित था, वे महारथी तुझे भय के कारण युद्ध से हटा हुआ मानेंगे और तू लघुता को प्राप्त होगा।

36 Verse 2.36
अवाच्यवादांश्च बहून् वदिष्यन्ति तवाहिताः।
निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दुःखतरं नु किम्।।36।।
English Meaning

Your enemies will speak many unspeakable words, decrying your prowess. What could be more painful?

हिंदी अर्थ

तेरे वैरी तेरे सामर्थ्य की निन्दा करते हुए बहुत-से न कहने योग्य वचन कहेंगे। इससे अधिक दुःख और क्या होगा?

37 Verse 2.37
हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्।
तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः।।37।।
English Meaning

Either slain you will attain heaven, or victorious you will enjoy the earth. Therefore arise, O son of Kunti, resolved to fight.

हिंदी अर्थ

या तो तू मारा जाकर स्वर्ग पायेगा, या जीतकर पृथ्वी का राज्य भोगेगा। इसलिए हे अर्जुन! निश्चय करके युद्ध के लिए खड़ा हो जा।

38 Verse 2.38
सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि।।38।।
English Meaning

Treating pleasure and pain, gain and loss, victory and defeat alike, engage in battle. Thus you will incur no sin.

हिंदी अर्थ

सुख-दुःख, लाभ-हानि और जय-पराजय को समान समझकर युद्ध के लिए तैयार हो जा; इस प्रकार करने से तू पाप को प्राप्त नहीं होगा।

39 Verse 2.39
एषा तेऽभिहिता सांख्ये बुद्धिर्योगे त्विमां शृणु।
बुद्ध्या युक्तो यया पार्थ कर्मबन्धं प्रहास्यसि।।39।।
English Meaning

This wisdom has been told in terms of Sankhya; now hear it in terms of Yoga (action). Endowed with it, O Partha, you will cast off the bondage of karma.

हिंदी अर्थ

हे पार्थ! यह बुद्धि तेरे लिए ज्ञानयोग (सांख्य) में कही गयी; अब इसे कर्मयोग में सुन, जिससे युक्त होकर तू कर्मबन्धन को त्याग देगा।

40 Verse 2.40
नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते।
स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात्।।40।।
English Meaning

In this path no effort is lost and no harm results; even a little of this dharma protects from great fear.

हिंदी अर्थ

इस कर्मयोग में आरम्भ का नाश नहीं और उलटा दोष भी नहीं; इस धर्म का थोड़ा-सा साधन भी जन्म-मृत्युरूप महान भय से रक्षा कर लेता है।

41 Verse 2.41
व्यवसायात्मिका बुद्धिरेकेह कुरुनन्दन।
बहुशाखा ह्यनन्ताश्च बुद्धयोऽव्यवसायिनाम्।।41।।
English Meaning

In this path, O joy of the Kurus, the resolute intellect is one-pointed; but the intellects of the irresolute are many-branched and endless.

हिंदी अर्थ

हे अर्जुन! इस मार्ग में निश्चयात्मिका बुद्धि एक ही होती है; किन्तु अस्थिर विचार वाले विवेकहीन मनुष्यों की बुद्धियाँ बहुशाखा और अनन्त होती हैं।

42-44 Verse 2.42 – 2.44
यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितः।
वेदवादरताः पार्थ नान्यदस्तीति वादिनः।।42।।
कामात्मानः स्वर्गपरा जन्मकर्मफलप्रदाम्।
क्रियाविशेषबहुलां भोगैश्वर्यगतिं प्रति।।43।।
भोगैश्वर्यप्रसक्तानां तयापहृतचेतसाम्।
व्यवसायात्मिका बुद्धिः समाधौ न विधीयते।।44।।
English Meaning

O Partha, the unwise, delighting in the flowery words of the Vedas, full of desires and intent on heaven, utter ornate speech promising rebirth as the fruit of action and prescribing many rites for pleasure and power. In those attached to enjoyment, whose discernment is stolen by such words, the resolute intellect fixed in samadhi does not arise.

हिंदी अर्थ

हे पार्थ! जो भोगों में तन्मय, कर्मफल-प्रशंसक वेदवाक्यों में प्रीति रखने वाले और 'स्वर्ग से बढ़कर कुछ नहीं' कहने वाले अविवेकी जन जिस पुष्पित (दिखावटी) वाणी को कहते हैं — जो जन्मरूप कर्मफल देने वाली और भोग-ऐश्वर्य हेतु नाना क्रियाओं का वर्णन करने वाली है — उस वाणी से जिनका चित्त हर लिया गया है और जो भोग-ऐश्वर्य में आसक्त हैं, उनकी परमात्मा में निश्चयात्मिका बुद्धि नहीं होती।

45 Verse 2.45
त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन।
निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान्।।45।।
English Meaning

The Vedas deal with the three gunas; rise above them, O Arjuna. Be free from the pairs of opposites, ever established in purity, free from anxiety for gain and preservation, established in the Self.

हिंदी अर्थ

हे अर्जुन! वेद तीनों गुणों के कार्यरूप भोगों का प्रतिपादन करते हैं; तू उनमें आसक्तिहीन, द्वन्द्वों से रहित, नित्य सत्त्व में स्थित, योग-क्षेम की चिन्ता से मुक्त और आत्मवान हो।

46 Verse 2.46
यावानर्थ उदपाने सर्वतः सम्प्लुतोदके।
तावान्सर्वेषु वेदेषु ब्राह्मणस्य विजानतः।।46।।
English Meaning

To the knower of Brahman, all the Vedas are of as much use as a small well when there is a flood of water everywhere.

हिंदी अर्थ

सब ओर से परिपूर्ण जलाशय के मिल जाने पर छोटे जलाशय में जितना प्रयोजन रहता है, ब्रह्म को जानने वाले का समस्त वेदों में उतना ही प्रयोजन रह जाता है।

47 Verse 2.47
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।।47।।
English Meaning

You have a right to action alone, never to its fruits. Let not the fruit of action be your motive, nor let your attachment be to inaction.

हिंदी अर्थ

तेरा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फलों में कभी नहीं। तू कर्मफल का हेतु मत बन, और कर्म न करने में भी तेरी आसक्ति न हो।

48 Verse 2.48
योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।
सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते।।48।।
English Meaning

Established in yoga, O Dhananjaya, perform actions abandoning attachment, even-minded in success and failure. This evenness of mind is called yoga.

हिंदी अर्थ

हे धनंजय! आसक्ति त्यागकर, सिद्धि-असिद्धि में समान होकर, योग में स्थित हुआ कर्तव्य कर्म कर; यह समत्वभाव ही योग कहलाता है।

49 Verse 2.49
दूरेण ह्यवरं कर्म बुद्धियोगाद्धनञ्जय।
बुद्धौ शरणमन्विच्छ कृपणाः फलहेतवः।।49।।
English Meaning

Action is far inferior to the yoga of wisdom, O Dhananjaya. Seek refuge in wisdom; wretched are those who act for results.

हिंदी अर्थ

इस समत्वबुद्धियोग से सकाम कर्म अत्यन्त निम्न है। हे धनंजय! तू समबुद्धि की शरण ले; फल के हेतु बनने वाले अत्यन्त दीन हैं।

50 Verse 2.50
बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते।
तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्।।50।।
English Meaning

Endowed with wisdom, one casts off both good and evil here itself. Therefore devote yourself to yoga; yoga is skill in action.

हिंदी अर्थ

समबुद्धि से युक्त पुरुष पुण्य और पाप दोनों को इसी लोक में त्याग देता है। इसलिए तू योग में लग जा; यह समत्वरूप योग ही कर्मों में कुशलता है।

51 Verse 2.51
कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः।
जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामयम्।।51।।
English Meaning

The wise, renouncing the fruits of action and freed from the bondage of birth, reach the state beyond all suffering.

हिंदी अर्थ

समबुद्धि से युक्त ज्ञानीजन कर्मफल को त्यागकर जन्मरूप बन्धन से मुक्त हो निर्विकार परम पद को प्राप्त होते हैं।

52 Verse 2.52
यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति।
तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च।।52।।
English Meaning

When your intellect crosses beyond the mire of delusion, you will become indifferent to all that has been heard and is yet to be heard.

हिंदी अर्थ

जब तेरी बुद्धि मोहरूप दलदल को पार कर जायेगी, तब तू सुने हुए और सुनने योग्य सब भोगों से वैराग्य को प्राप्त हो जायेगा।

53 Verse 2.53
श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला।
समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि।।53।।
English Meaning

When your intellect, bewildered by what you have heard, stands firm and steady in the Self, then you will attain yoga.

हिंदी अर्थ

भाँति-भाँति के वचन सुनने से विचलित हुई तेरी बुद्धि जब परमात्मा में अचल-स्थिर ठहर जायेगी, तब तू योग को प्राप्त हो जायेगा।

54 Verse 2.54
अर्जुन उवाच
स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव।
स्थितधीः किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत किम्।।54।।
English Meaning

Arjuna said: O Keshava, what is the description of one of steady wisdom, established in samadhi? How does such a one speak, sit and walk?

हिंदी अर्थ

अर्जुन बोले: हे केशव! समाधि में स्थित स्थिरबुद्धि पुरुष का क्या लक्षण है? वह कैसे बोलता, बैठता और चलता है?

55 Verse 2.55
श्रीभगवानुवाच
प्रजहाति यदा कामान्सर्वान्पार्थ मनोगतान्।
आत्मन्येवात्मना तुष्टः स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते।।55।।
English Meaning

The Blessed Lord said: When one casts off all desires of the mind, O Partha, and is satisfied in the Self by the Self alone, then is one called a person of steady wisdom.

हिंदी अर्थ

श्री भगवान बोले: हे पार्थ! जब यह पुरुष मन की सम्पूर्ण कामनाओं को त्याग देता है और आत्मा से आत्मा में ही संतुष्ट रहता है, तब वह स्थितप्रज्ञ कहा जाता है।

56 Verse 2.56
दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः।
वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते।।56।।
English Meaning

One unshaken in sorrow, free from longing for pleasures, from whom attachment, fear and anger have departed — such a sage is of steady wisdom.

हिंदी अर्थ

दुःख में जिसका मन उद्विग्न नहीं होता, सुख में जो निःस्पृह है, और जिसके राग, भय व क्रोध नष्ट हो गये हैं, वह मुनि स्थिरबुद्धि कहा जाता है।

57 Verse 2.57
यः सर्वत्रानभिस्नेहस्तत्तत्प्राप्य शुभाशुभम्।
नाभिनन्दति न द्वेष्टि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता।।57।।
English Meaning

One unattached everywhere, who neither rejoices on good nor hates the bad — such a one's wisdom is firmly fixed.

हिंदी अर्थ

जो सर्वत्र स्नेहरहित होकर शुभ या अशुभ को प्राप्त होकर न प्रसन्न होता है न द्वेष करता है, उसकी बुद्धि स्थिर है।

58 Verse 2.58
यदा संहरते चायं कूर्मोऽङ्गानीव सर्वशः।
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता।।58।।
English Meaning

When, like a tortoise drawing in its limbs, one withdraws the senses from their objects, then one's wisdom is firmly established.

हिंदी अर्थ

जैसे कछुआ अपने अंगों को समेट लेता है, वैसे ही जब यह पुरुष इन्द्रियों को विषयों से समेट लेता है, तब उसकी बुद्धि स्थिर है।

59 Verse 2.59
विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः।
रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तते।।59।।
English Meaning

The objects turn away from one who abstains, but the taste remains; even this taste turns away when the Supreme is seen.

हिंदी अर्थ

विषयों को ग्रहण न करने वाले के विषय तो निवृत्त हो जाते हैं पर आसक्ति नहीं; स्थितप्रज्ञ की आसक्ति भी परमात्मा का साक्षात्कार करके निवृत्त हो जाती है।

60 Verse 2.60
यततो ह्यपि कौन्तेय पुरुषस्य विपश्चितः।
इन्द्रियाणि प्रमाथीनि हरन्ति प्रसभं मनः।।60।।
English Meaning

The turbulent senses, O son of Kunti, forcibly carry away the mind even of a wise person striving for perfection.

हिंदी अर्थ

हे कुन्तीपुत्र! ये प्रमथन-स्वभाव वाली इन्द्रियाँ यत्न करते हुए बुद्धिमान पुरुष के मन को भी बलपूर्वक हर लेती हैं।

61 Verse 2.61
तानि सर्वाणि संयम्य युक्त आसीत मत्परः।
वशे हि यस्येन्द्रियाणि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता।।61।।
English Meaning

Restraining all the senses, one should sit steadfast, intent on Me; for one whose senses are mastered is of steady wisdom.

हिंदी अर्थ

साधक उन सब इन्द्रियों को वश में करके, समाहितचित्त होकर मेरे परायण होकर बैठे; जिसकी इन्द्रियाँ वश में हैं, उसी की बुद्धि स्थिर है।

62 Verse 2.62
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।
सङ्गात्सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते।।62।।
English Meaning

Brooding on sense-objects breeds attachment; from attachment springs desire, and from desire arises anger.

हिंदी अर्थ

विषयों का चिन्तन करने से उनमें आसक्ति होती है, आसक्ति से कामना और कामना में विघ्न से क्रोध उत्पन्न होता है।

63 Verse 2.63
क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः।
स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति।।63।।
English Meaning

From anger comes delusion; from delusion, confused memory; from confused memory, the loss of reason; and from loss of reason, one perishes.

हिंदी अर्थ

क्रोध से मूढ़भाव, मूढ़भाव से स्मृति-भ्रम, स्मृति-भ्रम से बुद्धि का नाश, और बुद्धि के नाश से यह पुरुष अपनी स्थिति से गिर जाता है।

64 Verse 2.64
रागद्वेषवियुक्तैस्तु विषयानिन्द्रियैश्चरन्।
आत्मवश्यैर्विधेयात्मा प्रसादमधिगच्छति।।64।।
English Meaning

But the self-controlled one, moving among objects with senses free from attachment and aversion, attains tranquillity.

हिंदी अर्थ

परन्तु अपने वश में किये अन्तःकरण वाला साधक, राग-द्वेष रहित वशीभूत इन्द्रियों से विषयों में विचरता हुआ अन्तःकरण की प्रसन्नता प्राप्त करता है।

65 Verse 2.65
प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते।
प्रसन्नचेतसो ह्याशु बुद्धिः पर्यवतिष्ठते।।65।।
English Meaning

In that tranquillity all sorrows are destroyed; the intellect of the tranquil-minded soon becomes firmly established.

हिंदी अर्थ

अन्तःकरण की प्रसन्नता होने पर सब दुःखों का अभाव हो जाता है, और प्रसन्नचित्त वाले की बुद्धि शीघ्र ही परमात्मा में स्थिर हो जाती है।

66 Verse 2.66
नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना।
न चाभावयतः शान्तिरशान्तस्य कुतः सुखम्।।66।।
English Meaning

There is no wisdom for the unsteady, no meditation for the unwise; without meditation no peace, and for the peaceless, how can there be happiness?

हिंदी अर्थ

अयुक्त पुरुष में निश्चयात्मिका बुद्धि नहीं, भावना नहीं; भावनाहीन को शान्ति नहीं, और शान्तिरहित को सुख कैसे?

67 Verse 2.67
इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते।
तदस्य हरति प्रज्ञां वायुर्नावमिवाम्भसि।।67।।
English Meaning

As wind carries away a boat on the water, so even one wandering sense, to which the mind yields, carries away one's wisdom.

हिंदी अर्थ

जैसे जल में नाव को वायु हर लेती है, वैसे ही विषयों में विचरती इन्द्रियों में से जिस एक के साथ मन रहता है, वह उसकी बुद्धि को हर लेती है।

68 Verse 2.68
तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः।
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता।।68।।
English Meaning

Therefore, O mighty-armed one, the wisdom of him whose senses are wholly restrained from their objects is firmly established.

हिंदी अर्थ

इसलिए हे महाबाहो! जिसकी इन्द्रियाँ विषयों से सब प्रकार वश में हैं, उसी की बुद्धि स्थिर है।

69 Verse 2.69
या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी।
यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः।।69।।
English Meaning

What is night for all beings is waking for the self-controlled; and what is waking for all beings is night for the seeing sage.

हिंदी अर्थ

सब प्राणियों के लिए जो रात्रि के समान है, उस परमानन्द में संयमी जागता है; और जिसमें सब प्राणी जागते हैं, तत्त्वदर्शी मुनि के लिए वह रात्रि के समान है।

70 Verse 2.70
आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं
समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत्।
तद्वत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वे
स शान्तिमाप्नोति न कामकामी।।70।।
English Meaning

As waters enter the ever-full, unmoved ocean, so the one whom all desires enter attains peace — not the one who craves desires.

हिंदी अर्थ

जैसे नदियों के जल परिपूर्ण, अचल समुद्र में उसे विचलित किये बिना समा जाते हैं, वैसे ही जिस स्थितप्रज्ञ में सब भोग विकार किये बिना समा जाते हैं, वही परम शान्ति पाता है — भोगों को चाहने वाला नहीं।

71 Verse 2.71
विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः।
निर्ममो निरहंकारः स शान्तिमधिगच्छति।।71।।
English Meaning

That person attains peace who, abandoning all desires, moves about free from longing, without 'mine' and without egoism.

हिंदी अर्थ

जो सम्पूर्ण कामनाओं को त्यागकर ममता, अहंकार और स्पृहा से रहित होकर विचरता है, वही शान्ति को प्राप्त होता है।

72 Verse 2.72
एषा ब्राह्मी स्थितिः पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति।
स्थित्वास्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति।।72।।
English Meaning

This is the state of one established in Brahman, O Partha; attaining it, one is not deluded. Fixed in it even at death, one attains oneness with Brahman.

हिंदी अर्थ

हे पार्थ! यह ब्रह्म को प्राप्त पुरुष की स्थिति है; इसे पाकर योगी मोहित नहीं होता, और अन्तकाल में भी इसमें स्थित होकर ब्रह्मानन्द को प्राप्त हो जाता है।

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